bhasha kise kahate hain – जनों भाषा किसे कहते है और इसके प्रकार

bhasha kise kahate hain – हम अपनी बात को किसी के सामने भाषा के द्वारा ही रखते है, भाषा ही वह माध्यम है जिससे हम अपने मन के भावना को किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा पाते हैं, आज हम जो भी पढ़ पते है, लिख पते है और इंसानी सभ्यता की प्रगति करने का मुख्य कारण भाषा ही है अगर हम भाषा के बारे में अच्छे से जानकारी रखेंगे तो हम अपने बारे में बता सकते हैं और दूसरे के बारे में भी जान सकते हैं इस वजह से यह आवश्यक है कि आप समझे bhasha kise kahate hain  

आमतौर पर भाषा किसे कहते हैं और भाषा के प्रकार जैसे प्रश्न बच्चों के किताब में होते हैं मगर इसकी जानकारी हर उम्र के इंसान को होनी चाहिए भाषा के व्याख्या को अगर आप सही तरीके से कर पाएंगे तो ही आप यह समझ पाएंगे कि किस प्रकार बिना सामने वाले को तकलीफ पहुंचाई अपनी बात कही जाती है अगर आप bhasha kise kahate hain जैसे प्रश्न में उलझे हुए है और इस के संदर्भ में विस्तारपूर्वक जानकारी जानने का प्रयास कर रहे है तो हमारे लेख के साथ अंत तक बने रहे। 

Bhasha kise kehte hai
Bhasha Kise Kehte Hai

व्याकरण किसे कहते हैं 

भाषा को जानने से पहले आपको व्याकरण के बारे में जानना होगा क्योंकि व्याकरण के अंतर्गत ही भाषा का प्रयोग किया जाता है। व्याकरण की समझ जिसे अच्छे से होगी वही व्यक्ति भाषा को सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा इस वजह से आवश्यक है कि आप व्याकरण की जानकारी को पहले एकत्रित करें। 

अगर व्याकरण का मतलब आसान भाषा में समझा जाए तो किसी भाषा को बोलना समझना और लिखना व्याकरण कहलाता है। व्याकरण के अंतर्गत हम किसी भाषा को अच्छे से बोलना शुद्ध से लिखना और समझना सीखते हैं। 

सभी भाषाओं के अलग-अलग व्याकरण होते हैं। अगर हमें उस भाषा के बारे में जानकारी प्राप्त करना होता है तो हमें पहले उस भाषा का व्याकरण पढ़ना जरूरी है। जब तक हम उस भाषा का व्याकरण सही से नहीं पढ़ेंगे। तब तक हम को उस भाषा के बारे में जानकारी नहीं मिलेगी और ना ही हम उस भाषा का इस्तेमाल कर पाएंगे। 

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए की हमें हिंदी भाषा के बारे में जानकारी प्राप्त करना है। तो सबसे पहले हमें हिंदी व्याकरण अच्छे से पढ़ना होगा। अगर हम हिंदी व्याकरण अच्छे से पढ़ लेते हैं तो हम हिंदी भाषा का प्रयोग लिखने समझने और बोलने में आसानी से कर सकते हैं। 

लेकिन अगर हम हिंदी भाषा का व्याकरण नहीं पडढते हैं तो हमारे सामने अगर कोई हिंदी बोलेगा या फिर लिखेगा तो हमें समझ में नहीं आएगा। कि वह क्या बोलना चाहता है या फिर वह क्या लिख रहा है। कहने का मतलब यह है कि किसी भी भाषा के बारे में जानकारी प्राप्त करने से पहले हमें उस भाषा के व्याकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करना होता है।

यह भी पढिए – जानिए की लेट कर पड़ने से क्या होता है।

bhasha kise kahate hain 

हमने आपको ऊपर यह तो बता दिया कि व्याकरण किसे कहते हैं और भाषा में व्याकरण का क्या महत्व होता है। अब आप ही आ जाना चाहते होंगे कि bhasha kise kahate hain और भाषा के कितने प्रकार होते हैं। 

भाषा के बारे में अगर हम समझे तो हम भाषा के माध्यम से अपने विचारों को किसी दूसरे के सामने बोलकर लिखकर या फिर पढ़कर रखते हैं। कहने का मतलब यह है कि जिस माध्यम से हम अपने विचारों को किसी दूसरे के सामने प्रकट करते हैं उसको भाषा कहा जाता है। 

हम आपको बता दें कि हम भाषा के द्वारा ही अपने भाव को एक दूसरे के सामने रख सकते हैं। बाकी किसी माध्यम से हम अपने भाव को एक दूसरे के समक्ष नहीं रख सकते हैं। भाषा का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ मनुष्य प्राणी ही कर सकता है बाकी धरती का और कोई भी प्राणी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। 

यह भी पढे – मझली फ़ार्मिंग कैसे करे – जानिए विस्तार से

भाषा कितने प्रकार के होते हैं 

हमने आपको ऊपर बताया कि bhasha kise kahate hain अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि भाषा कितने प्रकार के होते हैं। हम नीचे भाषा के सभी प्रकारों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त करते हैं। 

भाषा तीन प्रकार के होते हैं – 

मौखिक

अगर हम अपने विचारों को किसी के सामने बोल कर रखते हैं तो इस भाषा को हम मौखिक भाषा कहते हैं। जैसे कि हम अधिकतर किसी भी व्यक्ति के सामने अपने विचारों को प्रकट करने के लिए मौखिक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि मौखिक भाषा थोड़ा सा आसान होता है और हम बहुत जल्द इसका इस्तेमाल करना सीख जाते हैं। 

यानी कि अगर भाषा प्रकट करने वाला व्यक्ति अपने मुंह से बोलकर किसी दूसरे के सामने अपना भाव रख रहा है तो उससे मौखिक भाषा कहते हैं। इसको हम ऐसे भी समझ सकते हैं कि मुंह से बोले जाने वाली भाषा को मौखिक भाषा कहते हैं। 

लिखित 

अगर हम अपने विचारों को किसी के सामने रखने के लिए लिखने का सहारा लेते हैं यानी कि हम किसी के सामने लिखकर अगर अपने भावों को प्रकट करते हैं। तो इसे हम लिखित भाषा कहेंगे। 

अगर कोई लिखित भाषा का प्रयोग कर अपने भाव को प्रकट करना चाहता है। तो उसे पढ़ा लिखा होना जरूरी है और इसके साथ-साथ उसे उस भाषा में व्याकरण की जानकारी होनी बहुत जरूरी है जिस भाषा को वह लिखना चाहता है। 

अगर वह व्यक्ति व्याकरण नहीं जानता है तो वह उस भाषा को नहीं लिख सकता है। इसके साथ-साथ उस व्यक्ति को भी व्याकरण आनी जरूरी है जिस व्यक्ति के सामने वह अपना भाव लिखकर प्रकट करना चाहता है। 

कहने का मतलब यह है कि लिखित भाषा लिखने वाले को और लिखित भाषा पढ़ने वाले दोनों को भाषा के साथ-साथ उस भाषा के व्याकरण के बारे में अच्छे से जानकारी होनी जरूरी है। तभी वह इस भाषा को अच्छे से समझ पाएंगे या फिर इस भाषा को अच्छे से लिख पाएंगे। 

सांकेतिक 

अगर हम अपने विचारों को संकेत के माध्यम से किसी दूसरे के सामने रखते हैं तो इसे संकेतिक भाषा कहा जाता है। संकेतिक भाषा में हम अपने विचारों को इसारे की माध्यम से दूसरों को समझाते हैं कि हम क्या कहना चाहते हैं। 

सांकेतिक भाषा से बात करने के लिए हमें व्याकरण की जरूरत नहीं है। हम बिना व्याकरण के संकेतिक भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

यह भी पढिए – हवा से पतला क्या है

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q. भाषा किसे कहते हैं?

जिसके माध्यम से हम अपने भाव को दूसरे के सामने प्रकट कर सकते हैं उसे भाषा कहते हैं। 

Q. भाषा कितने प्रकार के होते हैं? 

भाषा मुख्यतः तीन प्रकार के होते है, मौखिक भाषा लिखित भाषा और सांकेतिक भाषा। 

Q. लिखित भाषा किसे कहते हैं? 

जिस भाषा के तहत हम लिखकर अपने बातों को किसी के सामने रखते है। उस भाषा को लिखित भाषा कहते है। उदाहरण के तौर पर आप किसी का खत पढ़ते हैं तो वह व्यक्ति खत के जरिए अपने मन की भावना अब तक पहुंचाता है और यह एक लिखित भाषा कहलाती है। 

Leave a Comment